स्टैक लाइट मॉनिटरिंग क्या है?
स्टैक लाइट मॉनिटरिंग का मतलब है मशीन के ऊपर लगी रंगीन लाइटों को एक छोटे डिवाइस से पढ़ना और जो वो दिखाती हैं उसे रिकॉर्ड करना। लाइटें बताती हैं कि मशीन चल रही है या रुकी है। डिवाइस समय के साथ रिकॉर्ड रखता है, तो आप फ्लोर पर घूमे बिना स्थिति देख लेते हैं।
लेखक Lalit Fauzdarप्रकाशित: आखिरी अपडेट:
स्टैक लाइट क्या होती है?
स्टैक लाइट रंगीन लैंपों की खड़ी मीनार है जो मशीन पर इसलिए लगती है कि उसकी स्थिति एक नज़र में दिख जाए। इसे टावर लाइट या सिग्नल टावर भी कहते हैं।
ज़्यादातर स्टैक में दो से पाँच लैंप होते हैं, और अक्सर एक बज़र भी। बात सीधी है। शेड के आखिरी सिरे पर खड़ा सुपरवाइज़र हर मशीन पर गए बिना देख सकता है कि किसे ध्यान चाहिए।
आपने एंडॉन शब्द भी सुना होगा। एंडॉन एक विज़ुअल सिग्नल या बोर्ड है जो लाइन की किसी समस्या की ओर ध्यान खींचता है। भारतीय शॉप फ्लोर पर स्टैक लाइट सबसे आम एंडॉन है।
लाल, पीली और हरी का क्या मतलब होता है?
कई मशीनों पर हरी का मतलब चल रही, पीली का मतलब इंतज़ार या चेतावनी, और लाल का मतलब रुकी या खराबी होता है। ये आम चलन है, पक्का नियम नहीं।
| लैंप | आम मतलब | इससे अलग भी हो सकता है |
|---|---|---|
| हरी | साइकिल में चल रही | मशीन तैयार है पर साइकिल में नहीं |
| पीली | इंतज़ार, चेतावनी, साइकिल खत्म | सेटअप चल रहा है, टूल लाइफ की चेतावनी |
| लाल | रुकी, अलार्म, खराबी | सिर्फ इमरजेंसी स्टॉप |
मतलब मशीन बनाने वाले के हिसाब से बदलते हैं, और कभी कभी मरम्मत के बाद एक ही मेक की दो मशीनों में भी। इसीलिए किसी डेटा पर भरोसा करने से पहले हर लैंप का मतलब हर मशीन के लिए तय किया जाता है। अंदाज़ा मत लगाइए।
डिवाइस लैंप कैसे पढ़ता है?
डिवाइस स्टैक के बाहर से महसूस करता है कि हर लैंप चालू है या बंद। वो पैटर्न को समय के साथ रिकॉर्ड करता है।
LiveMach में तीन लैंप वाले स्टैक के लिए stack_light_3 नाम की बिल्ट इन प्रोफाइल है। ये प्रोफाइल डिवाइस को बताती है कि तीन लैंप के सिग्नल कैसे पढ़ने हैं और कैसे रिकॉर्ड करने हैं।
डिवाइस मशीन के बाहर लगता है। अंदर कुछ काटा या दोबारा जोड़ा नहीं जाता, और वो मशीन से इलेक्ट्रिकली आइसोलेटेड है। इंटरनेट चला जाए तो वो लॉग करता रहता है और कनेक्शन लौटने पर सिंक कर देता है।
लैंप की वायरिंग हर मशीन में अलग होती है, इसलिए डिवाइस किसी खास स्टैक को ठीक किस तरह पढ़ेगा, ये पायलट में मशीन दर मशीन तय होता है।
लैंप के सिग्नल चल रही, रुकी, आइडल और बंद कैसे बनते हैं?
हर लैंप पैटर्न को चार मशीन स्टेट में से एक से जोड़ा जाता है। ये जोड़ हर मशीन के लिए तय होता है, फिर हर रीडिंग पर लगता है।
जोड़ का एक उदाहरण (हर मशीन के लिए तय होता है, आपका अलग हो सकता है)
| लैंप पैटर्न | मशीन स्टेट |
|---|---|
| हरी चालू | चल रही |
| लाल चालू | रुकी |
| पीली चालू | आइडल |
| कोई लैंप चालू नहीं, या पावर नहीं | बंद |
जोड़ तय हो जाने पर डैशबोर्ड हर मशीन की लाइव स्थिति दिखाता है। हर स्टेट में बिताया गया समय जुड़कर रन टाइम, डाउनटाइम और शिफ्ट रिपोर्ट बनता है।
अपने फ्लोर पर स्टैक लाइट मॉनिटरिंग कैसे शुरू करें?
एक ऐसी मशीन से शुरू कीजिए जिसकी स्टैक लाइट चालू है, और आगे बढ़ने से पहले वहाँ पक्का कीजिए कि हर लैंप का मतलब क्या है।
- 1मशीन के पास जाइए और नोट कीजिए कि कौन से लैंप लगे हैं, और मशीन के कटिंग करते, इंतज़ार करते, अलार्म में और बंद होने पर कौन से जलते हैं।
- 2ऑपरेटर और मेंटेनेंस टीम से पूछकर पक्का कीजिए कि हर लैंप का मतलब क्या है, और उसे लिख लीजिए।
- 3पायलट में हमारे साथ चार मशीन स्टेट से जोड़ तय कीजिए।
- 4कुछ शिफ्ट तक डैशबोर्ड को मशीन पर दिखती असली स्थिति से मिलाइए।
- 5नंबरों पर भरोसा करने से पहले कोई भी खराब या बाईपास लैंप ठीक कराइए।
इसके बाद ही अगली मशीन जोड़िए। एक ही मेक की मशीनों में अक्सर एक जैसा जोड़ होता है, पर हर एक को जाँचिए।
स्टैक लाइट मॉनिटरिंग क्या नहीं बता सकती?
लैंप स्थिति दिखाता है। वो रुकने का कारण या बने हुए पीस की गिनती नहीं दिखाता।
- कारण नहीं। लाल बताती है कि रुकी, ये नहीं कि टूल टूटा या माल का इंतज़ार था। ऑप्शनल डाउनटाइम रीज़न मॉड्यूल से ऑपरेटर इसे जोड़ सकता है।
- पीस काउंट नहीं। हरी लाइट ये नहीं बताती कि कितने पार्ट निकले।
- वायरिंग अलग होती है। मशीन बनाने वाले की लगाई लाइटें अपने तर्क पर चल सकती हैं, और कुछ मामलों में मशीन के कट न करने पर भी लैंप जला रह सकता है।
- लैंप खराब या बाईपास हो सकते हैं। फ्यूज़ बल्ब या किसी का बंद किया हुआ स्टैक गलत तस्वीर देता है।
अगर मशीन पर स्टैक लाइट ही न हो तो?
उसकी जगह करंट क्लैंप इस्तेमाल कीजिए। वो मशीन का खींचा हुआ करंट महसूस करता है और उसी से स्थिति पढ़ता है।
क्लैंप पावर केबल के चारों ओर बैठता है, इसलिए कुछ खोला नहीं जाता। चलती मशीन और चालू पर आइडल मशीन अलग करंट खींचती हैं, और डिवाइस इसी फर्क का इस्तेमाल करता है।
यही सिग्नल मॉडल दूसरे सेंसर कॉम्बिनेशन भी सपोर्ट करता है। किस मशीन के लिए कौन सा ठीक है, ये सर्वे में मशीन दर मशीन तय होता है।
मौजूदा CNC मशीनों पर स्टेप दर स्टेप देखने के लिए रीट्रोफिट गाइड पढ़िए। पुरानी CNC मशीनें रीट्रोफिट कैसे करें

